हाँ! मै घर में हूँ (कविता)

मनोरंजन

हां! मै घर में हूँ (कविता)

#stay_home  #stay_safe
हां! मै घर में हूं।
अपनों के संग ही अपने शहर में हूं।
हां! मै घर में हूं।
सारा शहर तो बंद पड़ा है छाई यहां खुमारी है,
ज़हर भरा है इंसानों में जो लाइलाज बीमारी है।
मै जो था एक निडर लड़का आज डर में हूं।
हां! मै घर में हूं।
हर शख़्स इस क़दर रूठने सा लगा है,
दोस्तो का साथ छूटने सा लगा है,
इस Lockdown दुनिया की कहर में हूं।
हां! मै घर में हूं।
इश्क़ भी करें कैसे दिल लगा नहीं सकते,
गले मिलने की तो दूर, हाथ मिला नहीं सकते।
आइना रख के सामने खुद की नज़र में हूं।
हां! मै घर में हूं।
ये अख़बार वाले भी बहुत कुछ छिपाने लगे हैं,
जनता “महामारी” में है, किसान ज़हर खा रहे हैं।
मै उन बेसहारा लोगों की खबर में हूं।
हां! मै घर में हूं।
सब साथ मिल के, एक हो के, क्यू ना चल रहे हो,
इक vurUs को भी धर्म का तुम नाम दे रहे हो।
उन बेअकल नकारात्मक लोगों की फिकर में हूं।
हां! मै घर में हूं।

— *#jahaaN_pOetry*
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